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Motu patlu story 3

 एक बार की बात है, फुरफुरी नगर में एक मेले का आयोजन हुआ। मोटू और पतलू दोनों बहुत उत्साहित थे और मेले का आनंद लेने के लिए तैयार हो गए।


मेले में उन्हें विभिन्न रंग-बिरंगे स्थान, राइड्स, खाने की दुकानें और शो देखने के लिए मिले। मोटू बालू की गाड़ी राइड पर जा रहा था जबकि पतलू गेलगली करने वाली मशीन पर था।


मोटू गाड़ी में बहुत खुश था और जोर-शोर से चिल्ला रहा था, "वाह! ये तो मजेदार है। आराम से सवारी का आनंद लें!"


पतलू गेलगली करने वाली मशीन में चढ़ा और बहुत उच्च स्वर में चिल्लाने लगा, "ये तो मज़ेदार है! मज़ा आ रहा है यार!"


दूसरे राइड्स पर जाते-जाते, मोटू और पतलू एक भूत बंगले के पास आ गए। यह सुनकर, दोनों डर गए और अपनी आँखें बंद कर ली।


मोटू भयभीत होकर कहा, "पतलू भैया, ये भूत बंगला है! हमें यहां से निकलना चाहिए।"


पतलू भी डर गया और उसने कहा, "हाँ मोटू भैया, आप सही कह रहे हैं। चलिए यहां से जल्दी निकलें!"


दोनों भागने लगे, लेकिन जब वे थोड़ी दूर चले, उन्होंने देखा कि भूत बंगला का नक्शा वास्तव में एक बड़े पेट की मक्खन दुकान के सामान की पट्टी थी!


मोटू और पतलू अपनी भूख से तुलना करते हुए हंसते हैं और एक-दूसरे को गले लगाते हैं। वे देखते हैं कि उन्होंने अपने डर को सिर्फ एक साधारण चीज़ में खो दिया।


इस अनोखी घटना से, मोटू और पतलू ने सीखा कि दर का आधार अक्सर हमारी सोचों और दृष्टिकोणों पर आधारित होता है। वे एक-दूसरे के साथ हंसते हैं और मेले के अद्वितीय और मस्त लम्हों का आनंद लेते हैं।

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