एक बार की बात है, जब फुरफुरी नगर में बारिश के दिनों का समय था। मोटू और पतलू अपने घर में बैठे हुए थे और उन्हें बोरियत बहुत हो रही थी।
बारिश के कारण सभी गलियों में पानी भर गया था और लोग घरों में बंद रह रहे थे। यहां तक कि मोटू और पतलू को भी टेलीविजन देखने में रुचि नहीं आ रही थी।
तभी एक विचित्र विचार उन्हें आया। मोटू ने पतलू से कहा, "पतलू भैया, हमें कुछ करना चाहिए। चलो, हम बारिश में नहाने चलें!"
पतलू बहुत ही हैरान हो गया और बोला, "मोटू भैया, तुम अजीब हो! बारिश में नहाना? वह तो बिलकुल पागलपन है!"
मोटू मुस्कराते हुए उसे समझाते हैं, "यार पतलू, हमें कभी-कभी अलग अनुभव करने की कोशिश करनी चाहिए। बारिश में नहाने से हमें अजीब और मजेदार अनुभव हो सकता है। आओ, चलो वहां चलें!"
अंततः, पतलू मान जाता है और वे दोनों बारिश में नहाने जाते हैं। वे पानी की बूंदों को अपने ऊपर गिराते हैं और एक-दूसरे के साथ नहाने का आनंद लेते हैं।
बारिश की धमाकेदार गाथा आरंभ होती है, जहां मोटू और पतलू भूखे शेर की तरह खाने की दौड़ में भागते हैं, गर्मी की छुट्टी मनाते हैं और आनंद के मस्त लम्हों को बिताते हैं। इस अनोखी बारिशी नहाने की यात्रा से वे अद्वितीय और खुश होकर वापस आते हैं, और अपने दोस्तों के साथ बारिशी अनुभव की कहानी सुनाते हैं।
